भगवद्गीता के 18 अध्याय
अठारह अध्याय
भगवद्गीता में 18 अध्याय हैं, और प्रत्येक अध्याय श्रीकृष्ण की शिक्षाओं के एक अलग पक्ष को खोलता है। ये सभी मिलकर बाह्य कर्म से आन्तरिक रूपान्तरण तक ज्ञान का एक सम्पूर्ण मानचित्र प्रस्तुत करते हैं।
उपलब्ध अध्याय
शीघ्र आ रहा है
01
अर्जुन विषाद योग
47 श्लोक
शीघ्र आ रहा है
02
सांख्य योग
72 श्लोक
शीघ्र आ रहा है
03
कर्म योग
43 श्लोक
शीघ्र आ रहा है
05
कर्म संन्यास योग
29 श्लोक
शीघ्र आ रहा है
06
ध्यान योग
47 श्लोक
शीघ्र आ रहा है
07
ज्ञान विज्ञान योग
30 श्लोक
शीघ्र आ रहा है
08
अक्षर ब्रह्म योग
28 श्लोक
शीघ्र आ रहा है
09
राजविद्या राजगुह्य योग
34 श्लोक
शीघ्र आ रहा है
10
विभूति योग
42 श्लोक
शीघ्र आ रहा है
11
विश्वरूप दर्शन योग
55 श्लोक
शीघ्र आ रहा है
12
भक्ति योग
20 श्लोक
शीघ्र आ रहा है
13
क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग
35 श्लोक
शीघ्र आ रहा है
14
गुणत्रय विभाग योग
27 श्लोक
शीघ्र आ रहा है
15
पुरुषोत्तम योग
20 श्लोक
शीघ्र आ रहा है
16
दैवासुर सम्पद्विभाग योग
24 श्लोक
शीघ्र आ रहा है
17
श्रद्धात्रय विभाग योग
28 श्लोक
शीघ्र आ रहा है
18
मोक्ष संन्यास योग
78 श्लोक
शीघ्र आ रहा है
अपनी यात्रा शुरू करें
प्रत्येक अध्याय पिछले अध्याय पर आधारित है और आपको बाह्य कर्म से आन्तरिक ज्ञान की ओर ले जाता है। आप अध्याय 1 से प्रारम्भ कर सकते हैं या अपनी वर्तमान जिज्ञासा के अनुरूप किसी भी शिक्षापरक अध्याय को चुन सकते हैं।